Dr. Kumar vishwas’s New Poem

प्यार जब जिस्म की चीखों में दफ़न हो जाये ,ओढ़नी इस तरह उलझे कि कफ़न हो जाये , घर के एहसास जब बाजार की शर्तो में ढले ,अजनबी लोग जब हमराह बन के साथ चले , लबों से आसमां तक सबकी दुआ चुक जाये ,भीड़ का शोर जब कानो के पास रुक जाये , सितम की मारी हुई वक्त की इन आँखों में ,नमी हो लाख मगर फिर भी मुस्कुराएंगे , अँधेरे वक्त में भी गीत गाये जायेंगे …..