“ आकाश के एक कोने को पकड़ कर, तारों की गिनती करने की जिद ,-जिद से आदत में तब्दील है हो जाती,
जीवनएक काली सफ़ेद ईरानी फिल्म की तरह चलता प्रतीत होता है.भाव दिखते हैं,भाषा समझ नहीं आती.
अपनी ही कहानी में आप अजनबियों की तरह पड़े रह जाते हैं.देखते देखते बीत जाता है दिन और शाम बहने लगती है. ”